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Bharat Ki Rajneeti Ki Andar Ki Baat


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  • ISBN13:9789387456334
  • ISBN10:9387456334
  • Publisher:Zorba Books
  • Language:Hindi
  • Author:Kumar Dhruv
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Highlights

  • ISBN13:9789387456334
  • ISBN10:9387456334
  • Publisher:Zorba Books
  • Language:Hindi
  • Author:Kumar Dhruv
  • Binding:Paperback
  • Pages:68
  • Sub Genre:General & Fiction, Hindi, reference
  • SUPC: SDL757690348

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Description

भारत की राजनीति की अंदर की बात यह सामग्री राजनीतिक परिदृश्य और हमारे राजनीतिक नेताओं, नौकरशाहों और हम लोगों के कार्यों के वास्तविक व्याख्यान हैं। मैंने आजादी के बाद से पिछले सत्तर साल से हमारे देश की राजनैतिक गतिविधियों का वर्णन किया है। मैंने पाया कि हमारे नेताओं के चरित्र और आदर्श बहुत कुछ बदल गया है । इससे पहले जो लोग राजनीति में आए, वे वास्तव में अपने देश से प्यार करते थे और बिना स्वार्थ के देश के लिए काम करते थे। वे अपने देश के लिए लड़े और जो भी उन्होंने देश के लिए कार्य किए वो दिल से था, इन नेताओं ने अपने देश से कुछ भी नहीं लिया, लेकिन अपने देश के लिए योगदान करने की कोशिश की और उनके लिए देश को गर्व है। वर्तमान में भारतीय राजनीति एक व्यवसाय बन गई है l वर्तमान पीढ़ी के राजनीतिक नेता राजनीति में शामिल होते हैं उन्हें और उनके परिवार को अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए। शब्द;लोकतंत्र; केवल वर्तमान भारतीय राजनीति और राजनेताओं के लिए शब्दकोश में है, भारत में, वर्तमान समय में राजनीति एक पेशे की तरह है और लोग देश के विकास के लिए नहीं, बल्कि राजनीति में आते हैं, पांच साल के कार्यकाल के दौरान पैसे कमाने के लिए और उनकी संपत्तियां बनाते हैं। इस देश में ग़रीब और अधिक गरीब और समृद्ध लोग और अधिक अमीर बनते जा रहे हैं। इस स्थिति के लिए जिम्मेदार दो बुनियादी चीजें हैं पहली बात तो शिक्षा की कमी है और दूसरा हमारे देश की आबादी है। नेता भी इसका लाभ उठा रहे हैं और वे जानबूझकर चाहते हैं कि और अधिक अशिक्षित लोग हो और इस देश में आम लोगों को असली मुद्दों से भटकाकर हिंदू-मुस्लिम, सामान्य और अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति या मंदिर और मस्जिद जैसे अन्य विषयों में उलझा कर व्यस्त रखा जाए। अंत में मुझे यह कहना है कि हर 15 अगस्त को हम झण्डा फहराते हैं, देशभक्ति गीतों को सुनते हैं और हमारी आजादी का आनंद लेते हैं लेकिन अंदर की कहानी यह है कि हमें स्वतंत्रता तो “गोरों” से मिली थी पर अब हम फिर से इन “कालों” के हाथों परातंत्र हैं l मैंने इस पुस्तक को साधारण भाषा में लिखा है ताकि सभी आसानी से समझ सके

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